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Kaalsarp-Dosh

॥ कालसर्प दोष व्यक्ति के कुंडली में होता है! ज्योतिषी के अनुसार- व्यक्ति के कुंडली में राहु और केतु की िस्थति आमने-सामने की होती है, तथा जब दोनों ग्रह १८० डिग्री पर रहते है और बाकी के सात ग्रह राहु केतु के एक तरफ हो जाये और दूसरी और कोई ग्रह न रहे, तब ऐसी परिस्थति में कुंडली में कालसर्प दोष का योग होता है ! तथा इसे ही कापसर्प दोष कहा गया है !

कहते है कालसर्प दोष होने से व्यक्ति को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है इसका निवारण करवाने के लिए- आप पंडित जी ऑनलाइन के माध्यम से भी पूजा करवा सकते है ! तथा कालसर्प दोष को का प्रभाव काम करने के लिए इस मंत्र को करना चाहिए -

ॐ नवकुलाय विद्यमहे विषदंताय धीमहि तन्नो सर्प: प्रचोदयात् .......

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॥ ॐ भूर्भुवः स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ अर्थ – हम ईश्वर की महिमा का ध्यान करते हैं, जिसने इस संसार को उत्पन्न किया है, जो पूजनीय है, जो ज्ञान का भंडार है, जो पापों तथा अज्ञान को दूर करने वाले हैं- वह हमें प्रकाश दिखाए और हमें सत्य के पथ पर ले जाए ॥

॥ ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः। स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः। स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः। स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ अर्थ – कीर्तिवाले ऐश्वर्यशाली इन्द्रदेव हमारा कल्याण करें, सबके पोषणकर्ता वे सूर्यदेव हमारा कल्याण करें। जिनकी चक्रधारा के समान गति को कोई रोक नहीं सकता, वे गरुड़देव हमारा कल्याण करें। वेदवाणी के स्वामी बृहस्पति हमारा कल्याण करें ॥